यदि मैं गूगल पर बम या ड्रग्स आदि के बारे में सर्च करता हूँ तो क्या भारत सरकार या पुलिस मुझे गिरफ्तार कर सकती है?
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इस प्रश्न का सटीक उत्तर कोई रक्षा विशेषज्ञ ही दे सकता है। पर मैं अपनी समझ से इसकी कड़ियाँ जोड़ने का प्रयास करता हूँ।
गिरफ्तारी होगी या नही यह काफ़ी कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि आप सर्च कैसे कर रहे हैं। DRDO का एक सॉफ्टवेयर है DRDO NetRa. इसे पुलिस, R&AW, IB और अन्य सुरक्षा एजेंसी इस्तेमाल करती है। इस सिस्टम की खूबी है कि यह इंटरनेट पर की गई हमारी हर गतिविधि को देखती रहती है।
बम, अटैक, ब्लास्ट, मारना/मरना जैसे कई कीवर्ड्स या हॉट वर्ड्स को हमेशा खंगालने का काम करती है। यह इंटरनेट पर skype जैसी VoIP (Voice over internet protocol) से भी इन शब्दों को कुछ सेकंड में छान सकती है।[1]
मैंने साइबर लॉ में ढूंढने की कोशिश की पर ऐसी कोई स्पष्ठ जानकारी तो नही मिल पाई। आप एक साधारण जिज्ञासु व्यक्ति या छात्र हो सकते है जिसे अपने प्रोजेक्ट के लिए कुछ टेक्निकल जानकारी चाहिए हो।
- आप जानना चाहते हो कि एक बम क्या है? ठीक है।
- बम के मुख्य भाग क्या-क्या होते है? ठीक है!
- बम का बाहरी शेल किसका बना होना चाहिये? गड़बड़ है।
- C4 प्लास्टिक कहाँ मिल सकता है? बहुत गड़बड़ है।
- सर्किट, फ्यूज और ट्रिगर मैकेनिज्म (टाइमर, रिमोट डेटोनेशन या डेड मैन स्विच)? शायद अब तक आपको संदिग्ध की श्रेणी में डाल दिया गया हो।
- आप सभी पुर्ज़ों के बाज़ार सर्च करने लगते है। शायद पुलिस on the way हो।
सॉफ्टवेयर बहुत बुद्धिमान है। शायद ज्यादातर मामले सामान्य हो पर इंटरनेट पर किसी भी तरह की संदिग्ध बार-बार दुहराई गई प्रवित्तियों से गलत सिग्नल जा सकता है।
जिज्ञासा अच्छी बात है पर आवश्यकता से अधिक जिज्ञासा मुसीबत में भी डाल सकती है। इस क्षेत्र का कोई जानकर विशेषज्ञ अगर इस विषय पर हमारी और मदद कर सकता है तो बड़ी ख़ुशी होगी।
धन्यवाद!
फुटनोट
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