एक विवाहित व्यक्ति क्या जानता है जो कि अविवाहितों को नहीं पता?

यही कि शादी कभी नहीं करनी चाहिए। इसके अनंत पहलू हैं लेकिन फ़िलहाल मसलन एक देखते हैं:
एक शादीशुदा लड़के के माँ बाप घूमने गए हैं। वापस आते आते लंच टाइम हो जाएगा। घर की बहू बोली चलो मैं खाना बना देती हूँ माँ जी और पिताजी के लिए। क्या बनाऊँ?
लड़का खुश, कि अच्छी बहू घर आयी है। सादा सा खाना बनाने के तौर पे वह अपनी बीवी से लौकी, दाल, रोटी और चावल बनाने का सुझाव देता है।
माँ बाप घर आने पे खाना बना हुआ देख कर बोले "बेटे हम रविवार के दिन लौकी नहीं खाते, तुम्हें पता नहीं?" माँ झटपट से कुछ ज्यादा ही फुर्ती से रसोई में जुट जाती है।
अब बहू की बारी
"तुमने जान बूझकर लौकी बनवाई ताकि मैं विलेन (villain) बन जाऊँ"
बेटे की स्थिति देखें - उसकी सारी जिंदगी उसने कभी अपने आप, अकेले इस बात का फैसला नहीं किया होगा कि आज खाने में क्या बनेगा और क्या नहीं। इसका मतलब क्या हुआ - कि बेटा जिंदगी भर का समय याद करे कि भई पिछले तकरीबन 1500 इतवार में से एक भी बार घर में कई सारी सब्जियों में से सिर्फ लौकी नहीं बनी है तो इसका मतलब यह एक संयोग नहीं, बल्कि इतवार घर में लौकी नहीं बनानी है।?
अविवाहित लोग गौर करें - एक साधारण खाने को ले कर क्या कभी बवाल हो सकता है?
विवाहित लोग - क्या कहते हैं?

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